भारत की संस्कृति विविधताओं एवं चमत्कारों से सजी-धजी है। ऐसा ही एक चमत्कारिक स्थान है बटेश्वर जो उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित है। चमत्कार ऐसा कि यहां बटेश्वर से 4 किलोमीटर तक यमुना नदी उल्टी दिशा में बहती है। तथा यमुना मैया के किनारे भगवान शिव के 108 मंदिर हैं,...
मैं यह जानती थी कि दक्षिणेश्वर काली मन्दिर एक आध्यात्मिक व ऐतिहासिक महत्त्व वाला प्रसिद्ध काली मन्दिर है, साथ ही यह कोलकाता का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र भी है। यह मन्दिर दार्शनिक व धर्मगुरु, स्वामी रामकृष्ण परमहंस की कर्मभूमि भी रहा है, जहाँ उन्हें का...
बेंगलुरु शहर के डोम्लुर क्षेत्र में स्थित सूर्य नारायण मंदिर भारत के सूर्य देव मंदिरों में अनुपम है। मैंने सबसे पहले कोणार्क के सूर्य मंदिर की अत्यधिक प्रशंसा सुनी थी और अभी कुछ समय पूर्व उसे देखा भी। निस्संदेह वहां का वास्तुशिल्प, नक्काशी और परिकल्पना उच्च कोटि की रह...
नील-शैल-मालाओं पर स्थित माँ भगवती कामाख्या का यह दिव्य मंदिर 51 शक्तिपीठों में मुख्य है। यह मंदिर तीन भागों में बना हुआ है। इसका पहला हिस्सा सबसे बड़ा है, जहांँ पर हर भक्त को जाने नहीं दिया जाता है। दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं, जहांँ एक पत्थर से हर समय पान...
तीर्थ का तात्विक तात्पर्य है –
“'तीर्थते अनेन या तरति पापादिक यस्मात” अर्थात जिससे तर जाया जाए या पापमुक्त हुआ जाए। तीर्थ बहुत ही पवित्र दृष्टि से देखे जाते हैं। वहाँ जाने से लोग अपना सौभाग्य समझते हैं और गौरव की अनुभूति करते हैं। उन्ह...
नियत कार्यक्रम के अनुसार भोपाल से नवमी की पूजा करके प्रातः सात बजे हम दोनों और भाई साहब -भाभी ओरछा के लिए निकल गए। नाश्ता, भोजन सभी साथ था। प्राकृतिक सौंदर्य, इतिहास, धर्म और सांस्कृतिक धरोहर का साक्षात्कार कराने वाली यात्रा होगी - बहुत आनंद रहेगा, यह सोच हमको उल्लसित...
वनदेवी मां अंगार मोती परम तेजस्वी 'ऋषि अंगिरा' की पुत्री हैं। जिनका आश्रम, सिहावा के पास गंढाला में स्थित है। कहते हैं कि, मां अंगार मोती एवं मां विंध्यवासिनी दोनों बहने हैं। कहा जाता है कि, देवी का मूल मंदिर 'चंवर गांव' में स्थित है। किवदंती के अनुसार सप्...
शक्ति पीठों की इस श्रृंखला में, अगला नाम "अंबिकापुर की माँ महामाया" का आता है। जिनका एक नाम अंबिका भी है। जिनके नाम पर यह शहर, अंबिकापुर कहलाया। महामाया मंदिर की स्थापना १५वी शताब्दी के आसपास हुई थी। यह एक जागृत एवम् स्वयंभू मूर्ति है। शक्तिपीठ होने के साथ ही, यह सरगु...
कहते है इस क्षेत्र के पत्थर - पत्थर में देवी देवता विराजमान हैं। टूटी-फूटी मूर्तियां, पत्थर और तांबे पर कुरेदे अजीब अक्षर, पकी मिट्टी के खिलौने-ठीकरे और सोने, चांदी, तांबे के सिक्के, ढेरों तरह के अवशेष और न जाने कितने पुराने देवालयों के खंडहर भी प्राप्त होते रहत...
शक्ति पीठों की श्रृंखला में अगला नाम आता है, महासमुंद जिले के बागबहरा के निकट स्थित, गांव घुंचापाली में स्थापित, चंडीमाता मंदिर का।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 105 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव बगबहरा, अपने चारों ओर प्राकृतिक सौंदर्य समेटे, कोला...
इस मन्दिर की स्थापना के बारे कहा है कि इस जगह पर पूर्व में घना जंगल था जहां वनवासी निवास करते थे, एवं शिकारी जानवरों का शिकार करने जाया करते थे, और घसियारे चारा लेने जाते थे। एक दिन घसियारों को एक काला चमकीला आकर्षक पत्थर दिखाई दिया जिसके इर्द-गिर्द जंगली काली बिल्लिय...
हैहय वंशीय राजाओं ने कुलदेवी महामाया के 36 मंदिरों का निर्माण किया जिनमें से 18 शिवनाथ नदी के इस पार और 18 मंदिर उस पार स्थापित है। अधिकांश मंदिर किलों की शुरुआत में स्थापित है और कुछ राजमहलों के निकट ही है। उनमें से एक विशेष तांत्रिक रूप से निर्मित पुरानी बस्ती रायपु...
